http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/03/140322_afghan_journalist_kabul_hotel_attack_killed_tk.shtml
एक गोली,
rajeev3007@gmail.com
एक गोली,
जो
धाँय से चलती
है,
चीर
देती है सीना,
क्या
मारेगी किसी को
?
मारता तो
कलमगार है।
कि
सर्र्– सर्र्,
लब्ज
ब लब्ज,
दिमाग को
झकझोर देता है।
और
बदल जाती है
पीढियाँ।
कि
बंदूक उठाने का
जुनून ही
मिट
जाता है दिल
से।
कैसे
मारोगे ?
कितने तो
हैं सरदार अहमद।
वो
तो अब भी
जिंदा है।
हर
लब्ज़ में।
हर
किताब में।
हर
दिमाग में।
हर
सीने में।
rajeev3007@gmail.com