Saturday, March 22, 2014

अफ़ग़ानिस्तान: पत्रकार का परिवार समेत क़त्ल

http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/03/140322_afghan_journalist_kabul_hotel_attack_killed_tk.shtml

 
एक गोली,

जो धाँय से चलती है,

चीर देती है सीना,

क्या मारेगी किसी को ?

मारता तो कलमगार है।

कि सर्र्सर्र्,

लब्ज लब्ज,

दिमाग को झकझोर देता है।

और बदल  जाती है पीढियाँ।

कि बंदूक उठाने का जुनून ही

मिट जाता है दिल से।

कैसे मारोगे ?

कितने तो हैं सरदार अहमद।

वो तो अब भी जिंदा है।

हर लब्ज़ में।

हर किताब में।

हर दिमाग में।

हर सीने में।

rajeev3007@gmail.com

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